तीसरा फ्रेम कान्हा की मेज़ का है, झील के मंच नहीं। 8 मई। शुक्रवार। जगह: कान्हा, मंडला। मेहमान: मलेशियाई वन विभाग। संख्या शीट की: 7 सदस्य। अवधि: तीन दिन।
पहला दिन खटिया ईको सेंटर। विषय: वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, आधुनिक पद्धति। नज़र चौथा दिन नहीं खोलती।
जो फील्ड है, जो बाड़ा नहीं
भ्रमण कराने वाले: एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति; फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी। सूची: अनाथ शावकों का पुनर्वास; ग्राम पुनर्स्थापन; पर्यटन प्रबंधन। प्रतिनिधिमंडल ने मॉडल अपनाने में रुचि कही—वाक्य, अनुबंध नहीं।
सत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. नेगी, डिप्टी डायरेक्टर सहित अधिकारी। चित्र खुले मैदान में खड़े समूह का फ्रेम है। शावक बाड़ा इस काट में नहीं।
मुख्य बातें
- 7 सदस्य और तीन दिन शीट की पंक्ति हैं; आठवाँ नाम नहीं।
- यह अध्ययन भ्रमण है, समझौते की रसीद नहीं।
- चित्र खुले मैदान के ग्रुप का फ्रेम है; शावक बाड़ा इस कोण में नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल की वन एवं वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की सराहना ↗8 मई 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।



